बाबा बागनाथ मंदिर में ऐसी परंपरा, किसी के अंतिम संस्कार वाले दिन कुछ नहीं खाते भोलेनाथ
बागेश्वर: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बाबा बागनाथ मंदिर में एक अनूठी और संवेदनशील धार्मिक परंपरा निभाई जाती है। सरयू, गोमती और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्थित इस मंदिर के समीप बने श्मशान घाट में जब भी किसी का अंतिम संस्कार (शवदाह) हो रहा होता है, तब भगवान शिव को दाल-भात का नियमित भोग नहीं लगाया जाता है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल के अनुसार, भगवान शिव 'श्मशानवासी' हैं और आसपास शोक का माहौल होने पर उन्हें भोजन अर्पित करना उचित नहीं माना जाता। यदि पूरे दिन अंतिम संस्कार का सिलसिला चलता रहे, तो मंदिर में भोग की प्रक्रिया स्थगित रहती है, हालांकि नियमित आरती और दर्शन जारी रहते हैं। धार्मिक मर्यादा को बनाए रखने के लिए दिनभर के शोक के बाद रात की आरती में मिठाई का भोग लगाया जाता है। स्थानीय लोग इस परंपरा को कुमाऊं की गहरी संवेदना और संस्कृति का प्रतीक मानते हैं।

चीख-पुकार में बदली दोपहर की मस्ती: मैहर में दो परिवारों के चिराग बुझे
वोटिंग लिस्ट में गड़बड़झाला: आलीराजपुर के 17 वोटर्स के संवैधानिक हक पर अधिकारियों की मार
Health Tips: पाचन तंत्र को लोहे जैसा मजबूत बना देगा 30/30/3 नियम, आज ही करें ट्राई।
हाई कोर्ट में पुलिसिया जांच पर सवाल: भाई की शादी के नाम पर खुद की शादी की गलत रिपोर्ट
बंगाल में मोहन यादव का प्रहार: "जंगलराज से त्रस्त जनता अब मांग रही है हिसाब"